Friday, May 28, 2021

बिहार चुनाव का बिहारियों पर प्रभाव

बिहारियों की इच्छा थी कि बिहार को गुजरात,हरियाणा,पंजाब,तमिलनाडु और महाराष्ट्र बनाने के बजाय बिहार बना रहने दें बिहार के चुनाव में ईश्वर ने उनकी इच्छा पूरी कर दी.
अपनी जाति और मजहब के नेताओं को बिहार के चुनाव में गद्दी सौंप कर बिहारी अब दुसरे राज्यों में मजदूरी करने,रिक्शा और ठेला चलाने वापस जा रहे है.
बिहार के चुनाव में जदयू को 71 सीट और 80 सीट राजद को मिली,मतलब साफ है नितीश के सुशासन के बदले लालू का जातिवाद ज्यादा मजबूत साबित हुआ.
BIHAR के चुनाव में BIHARI और BAHARI के बदले जातिवाद के कारण बनी गूंगी,अंधी और BAHRI जनता चुनाव जीत गई है.
मोदी के DNA में विकास है,बिहार के DNA में जातिवाद और दुसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करना ठेला,रिक्शा चलाना है,NDA इसी कारण बिहार के चुनाव में हारी
बिहार में विकासवादी सोंच रखनेवाले चिराग पासवान की उम्मीदों का चिराग बुझाकर "बिहारत्व" को प्राप्त करनेवालों को  अब तेजस्वी का तेज देखने के लिए अब  तैयार रहना चाहिए.
पंजाब,महाराष्ट्र और गुजरात में लोकल मजदूर एक तो मिलते नही,मिलने पर भी बहुत महंगे मिलते है,बिहार के चुनाव के बाद उनकी इस  चिंता को बिहारी वहाँ जाकर दूर करेंगे
जनता का मत ईश्वरीय शक्ति का प्रकट रूप है,भले ही बिहार में "विकास पुरुष" हार गया और "विनाश पुरुष" जीत गए,लेकिन जनता के मत का आदर करना एकदम जरूरी है.



 

Sunday, October 18, 2015

सेक्युलर हिन्दू विरोधी होता है.

 एक धार्मिक आदमी हिंदू और मुसलमान में भेद नहीँ कर सकता,मगर एक धर्म से निरपेक्ष आदमी निश्चित ही किसी का विरोधी हो सकता है.बंगाल में नन के साथ बंगलादेशियो द्वारा बलात्कार पर हो हल्ला और कश्मीरी हिंदू ओरतों के बलात्कार पर सन्नाटा,ऐसा क्यों?मरनेवाला कभी हिंदू कभी मुसलमान होता है,फिर उनके परिवार को मिलनेवाली सरकारी नौकरी और सहायता में भेदभाव क्यों? जबकि हिंदू के मरने पर भी खून निकलता है,उसे 15 मिनट में खत्म करने की बात की जाती है ,क्या सेकुलर नेता और मीडिया ये बात समझेंगे?बंगलादेश,पाकिस्तान में ही नहीँ हिंदू बहुल हिंदुस्तान में हिंदू असुरक्षित हैं, लेकिन ये बात सेकुलर नेता और मीडिया नहीँ मानेगी.

Thursday, August 27, 2015

देश के भले के लिए जातिगत आरक्षण बंद करना जरुरी है.

जातिगत आरक्षण बंद करना इसलिए भी जरूरी है कि अम्बेडकर से ज्यादा डिग्री 20 वीं सदी में किसी के पास नहीँ थी,पिछड़ी जाति होने के बाद भी आरक्षण उन्होनें नही माँगा.जातिगत आरक्षण बंद करना इसलिए भी जरूरी है कि अपनी बुराइयों के बावजूद अकबर को महान इसलिए बोला गया कि वह प्रतिभाशाली नव रत्न लोगों के बल पर शासन चलाता था.
गुजरात और बिहार का राजनीति में विशेष स्थान है,जहाँ मोदी बिहार को गुजरात बनाने की कोशिस कर रहे है,वहीं हार्दिक पटेल गुजरात को बिहार बना रहे है और यह भी जातिवादी आरक्षण के कारण हो रहा है.लालू यादव अपना तबीयत खराब होने पर अपनी बेटी डॉक्टर मीसा भारती से इलाज नही करवाते हैं,इस प्रकार के आरक्षण को खत्म करने से ही देश आगे बढ़ेगा.
यूनान,मिश्र और रोम सिर्फ इसलिए डूबे कि वहाँ प्रतिभाशाली इन्सान की कोई कद्र नहीँ होती थी,यदि भारत में प्रतिभा की कद्र नही होगी तो ये भी डूबेगा.जातिगत आरक्षण बंद करना इसलिए भी जरूरी है कि प्रतिभाशाली आदमी भले ही वह कोई भी हो,यदि उसे हटाकर अयोग्य आदमी को नौकरी दी गई तो यह देश नष्ट हो जाएगा.
आरक्षण मानसरोवर झील है,जहाँ केवल हंस उड़ सकते हैं.प्रतिभा खुला असमान है,जहाँ केवल हंस ही नहीँ,गौरैया से लेकर गरुड़ तक सबको उड़ने की इजाजत है.

Wednesday, August 26, 2015

भारत-पाक वार्ता हमेशा निरर्थक होगी.

मोदी चाहकर भी काश्मीर  पाकिस्तान को  नहीँ दे सकते, पाकिस्तान काश्मीर को छोडकर बात नहीँ कर सकता, बेहतर होगा पाकिस्तान से बात करना रोक दिया  जाए.भारत सरकार पाकिस्तान  से भले  ही लाख  बार बात कर ले,पाकिस्तान हर बार हमेशा ही कुछ ऐसा करेगा कि बात करने का कोई मतलब नहीं रह पाएगा।    
महाराजा हरीसिंह ने आज़ादी के समय पूरे काश्मीर को पाकिस्तान के बदले भारत में मिलाया था,तब किस आधार पर पाकिस्तान काश्मीर पर अपना दावा करता है?
जिस प्रकार सरकारी स्कूलों के अधिकाँश शिक्षक पढ़ाने के सिवा सारे काम करते हैं,उसी प्रकार पाकिस्तान आतंकवाद के सिवा हर चीज़ पर बात करना चाहता है।
 जब काश्मीर में रहनेवाले काश्मीरी पंडित काश्मीर में ही रह नहीं सकते,तब भला किस आधार पर काश्मीर को पाकिस्तान अपने देश में मिलाना चाहता है?काश्मीरी पंडितों को अलग कॉलोनी में बसाना ही ठीक होगा,पहले वे वहाँ से भगाए जा चुके हैं और आजकल पाकिस्तानी झंडे फहराने का विरोध नही होता है।
हुर्रियत नेता केजरीवाल से भी बड़े नौटंकीबाज़ हैं,वे काश्मीर  में पाकिस्तानी झंडा फहराने और पाकिस्तान द्वारा हड़पे गए काश्मीरी इलाके पर कुछ नहीं कहते।

Tuesday, August 25, 2015

केवल प्रतिभाशाली को आरक्षण मिलना चाहिए.

जिस देश में प्रतिभाशाली आदमी रोता हो या विदेश चला जाता हो,वह देश भारत जैसा फटेहाल हो जाता है,मगर यह बात जातिवादी नेता समझ ही नहीँ सकता है.यदि जन्म,जाति,प्रान्त,भाषा,लिंग,उम्र,गरीबी और विकलांग के बदले केवल प्रतिभाशाली को आरक्षण दिया जाय,भले ही वह कोई भी हो,तब देश स्वर्ग बन सकता है. 
जन्म या जाति पर आरक्षण मिलने से केवल इन जातियो के ताकतवर लोगों और मुलायम,लालू,मायावती,हार्दिक पटेल जैसे नेताओं को फायदा होता है,आम आदमी को नहीँ.शासन चलाना बैल गाड़ी चलाने जैसा सरल काम नहीँ है,शासन चलाना हवाई जहाज़ चलाने जैसा जटिल काम है,जिसे कोई प्रतिभाशाली ही चला सकता है.

Wednesday, June 24, 2015

पाकिस्तानी आतंकवाद और चीनी विस्तारवाद रोकना जरुरी है.

लखवी के मामले में चीन ने भले ही पाकिस्तान का साथ दिया हो,मगर उसने चीन में मुसलमानों के अधिकार छीन लिए हैं,और पाकिस्तान इस पर कुछ नहीँ बोल रहा.U.N.O.के चार स्थाई सदस्य अमेरिका,रूस,फ़्रांस और इंग्लैंड यदि जर्मनी और इजरायल के साथ भारत का साथ दें तभी चीन-पाकिस्तान समेत आतंकवाद खत्म होगा.यदि पाकिस्तानी आतंकवाद और चीनी विस्तारवाद को रोका न गया तब ये दोनों ताकतें पूरी दुनियाँ को नष्ट करते हुए अंत में स्वयं भी नष्ट हो जाएंगी.

Monday, June 1, 2015

मोदी शासक हैं और केजरीवाल नौटंकीबाज़ हैं.

प्रशासक (अफसर) हाथी के समान होता है,बहुत ज्यादा खाता,बहुत ज्यादा निकालता,बहुत धीमा चलता और काम करता है.शासक (नेता) महावत के समान होता है.यदि शासक (नेता) प्रशासक (अफसर)से डर जाय,उसकी चापलूसी करे,उससे कमीशन माँगने लगे या नौटंकी करने लगे तब वह कायदे से शासन नही कर सकता है.नरेंद्र मोदी ने पहले गुजरात और अब दिल्ली में प्रशासन के उपर पकड़ बनाकर अपने को शासक साबित किया जबकि नौटंकीबाज़ केजरीवाल शासक नहीँ बन पाए.

Thursday, April 2, 2015

गोरे आदमी आक्रामक होते हैं,भूरे और काले आदमी आक्रामक नहीं होते.

भले ही लोग मंत्री होने के नाते ‪#‎GirirajSingh‬ की आलोचना करें,मगर हकीकत ये है कि काले आदमी आक्रामक नहीं होते,सफेद चमड़ी वाले ही आक्रामक होते हैं और भूरी चमड़ेवाले मानसिक रूप से सफेद चमड़ी वालोँ के गुलाम होते हैं.अन्यथा सफेद चमड़ी वालों के कानून,उनकी भाषा,उनकी चिकत्सा पद्धति,उनका पहनावा,उनके खेल,उनका खान-पान,उनका कौमनवेल्थ,उनकी आर्थिक नीतियाँ क्यों अपनाते?
वे क्यों नहीं एक गोरी चमड़ी की औरत से शादी करने के बजाय काली चमड़ी की औरत से शादी करते?काली चमड़ी,सफेद चमड़ी और भूरी चमड़ी की यह व्याख्या भले ही शत-प्रतिशत सत्य न हो,मगर 90% सत्य जरुर है.

Tuesday, March 25, 2014

शंकराचार्य से हिन्दू नहीं बना,हिन्दुओं से शंकराचार्य बने हैं.

हर हर मोदी के नारे को महादेव या भगवान शंकर का अपमान बताने वाले शंकराचार्य स्वरूपानंद स्वयं भगवान शंकर और आदिगुरु शंकराचार्य का अपमान कर रहे हैं.उन्हें खुद को शंकराचार्य कहने का अधिकार इसलिए भी नहीं है कि शंकराचार्य एक धार्मिक पुरुष थे और उनका जन्म हिन्दू धर्म को बौद्ध धर्म के पाखण्ड से बचाने के लिए हुआ था,और स्वरुपानन्द ने हिन्दू धर्म को बचाने के लिए आजतक कुछ भी नही किया है.

हिन्दू गाय को माता के समान मानते हैं,और हिन्दुओ के ही हिन्दुस्तान में इतनी गायों को मारा जाता है कि हिन्दुस्तान दुनिया के देशों में गाय का मांस का निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश हो गया है.हिन्दू गंगा को भी माँ मानता है,और गंगा नदी संसार की सबसे गन्दी नदी हो गई है.हिन्दू भारत देश को भारत माता के नाम से पुकारता है और भारत माता को कुछ लोग डायन कह कर बुलाते हैं.राम को हिन्दू अवतार मानते हैं और राम के बनाए रामसेतु को कुछ नेता तोड़ने की बात करते हैं.मकबूल फ़िदा हुसैन हिन्दू देवियों की नंगी तस्वीरें बनाते थे,इन सभी बातों का स्वरुपानन्द ने कभी विरोध नहीं किया.

क्रिकेट को धर्म और सचिन को भगवान कहने वाले नेताओं और मीडिया का विरोध इन्होने क्यों नही किया?असम,काश्मीर,पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दुओं के ऊपर हो रहे अत्याचारों का विरोध वे क्यों नही करते.ओवैसी 5 मिनट में हिन्दुओं को खत्म करने की बात करता है और ये चुप रहते हैं.कुछ महिला और पुरुष नेता अपनी मूर्तियाँ देवी देवता की तरह बनवा रहे हैं और ये चुप रहते हैं.

फायर फिल्म में स्त्री समलैंगिकों का नाम सीता और राधा रखा जाता है,रामलीला के नाम पर बेहूदा फिल्म बनाई जाती है,महेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट राधा सेक्सी गाने पर ठुमके लगाती है,नंगी फिल्मो की हीरोइन सनी लीओन की फिल्म “रागिनी M.M.S.2” में हनुमान चालीसा गाया जाता है.इन सभी बातों का हिन्दू धर्म के सबसे बड़े धर्माधिकारी होने के नाते विरोध करना इनका धर्म होता,मगर स्वरूपानंद धार्मिक हैं ही नहीं वे धर्म से निरपेक्ष [सेकुलर] हैं.

पत्रकार द्वारा प्रश्न पूछना पत्रकार का धर्म है,पत्रकार की बातों का उत्तर देना धर्मगुरु का धर्म है,मगर पत्रकार की बात का उत्तर न देकर उसे थप्पड़ मारना अधर्म है.इस तरह का अधर्म स्वरूपानंद को करने का कोई अधिकार नही है.”मन न रंगाए रंगायो जोगी कपड़ा,दढ़िया बढ़ाए जोगी बन गए बकरा”वाली कबीर की बात धर्मगुरु को शोभा नही देती.

शंकराचार्य वे हिन्दुओ की वजह से बने हैं,शंकराचार्य की वजह से हिन्दू धर्म नही बना.शंकराचार्य को धर्मगुरु होने के नाते हिन्दू हितों की बात करनी चाहिए न की किसी नेता का समर्थन या विरोध

Saturday, March 15, 2014

अन्ना हजारे के क्रांति की मशाल बुझ चुकी है.

अन्ना हजारे गाँव से पूना,पूना से दिल्ली पहुंच कर महाराष्ट्र सदन में ठहरते है, और कम भीड़ होने के कारण बीमारी का बहाना करते हुए रैली में जाने से इन्कार कर देते हैं.मेरा नाम नहीं लेना,मेरी फोटो नहीं लगाना,जो करना है अपने दम पर करना जैसी बातें करने वाले अन्ना का घमंड कम भीड़ होने के कारण टूट गया.क्या शादी में कम भीड़ होने से कोई दूल्हा शादी करने से इन्कार कर देता है?उनका जादू आदमियों के बदले कुर्सियों के सर चढ़ कर बोल रहा था,ढेर सारी खाली कुर्सियाँ उन्हें सुनने को मौजूद थीं.
पलटी मारना केजरीवाल से कोई सीखे,मगर अन्ना हजारे पलटी मारने में भी केजरीवाल के गुरु हैं,गांधीवादी होने के बावजूद उन्होंने झूठ कहा की मेरी तबीयत ख़राब है.बाद में कहा कि मेरा समर्थन ममता को है,T.M.C.को नहीं.इससे पहले कहते थे कि मैं राजनीति में नहीं आऊंगा मगर राजनीतिज्ञ ममता से हाथ मिलाया,शायद इसे ही गुड़ खाकर गुलगुले से परहेज़ करना कहते होंगे.
व्यक्ति के विचारों का जब उसके कर्म से मेल होता है,तभी उसका महत्व होता है,केवल व्यक्ति या केवल विचार का कोई महत्व नहीं होता.अन्ना को याद रखना चाहिए कि काठ की हाँड़ी बार बार चुल्हे पर नहीं चढ़ती.उनके क्रांति की मशाल बूझ चुकी है,केवल धूँआ और राख ही उनके हाथ लगेगा.

Tuesday, January 28, 2014

बिन्नी केजरीवाल से बड़े नौटंकीबाज़ हैं.

नौटंकीबाजों की पार्टी “आप” से निकले विधायक बिन्नी ने अनशन करने में जबरदस्त नौटंकी करते हुए साढ़े तीन घंटे में फास्टेस्ट फ़ास्ट[अनशन] समाप्त कर दिया.दुनियाँ में एकलौते नौटंकीबाज़ केवल केजरीवाल ही नहीं हैं यही साबित करने के लिए बिन्नी ने अनशन की नौटंकी की.बहुत सारे लोग हर दिन 8 बजे नाश्ता करके 6 घंटा उपवास रखते हुए 2 बजे भोजन करते हुए अनशन करते हैं,उनसे भी गया गुजरा अनशन किया बिन्नी ने.अनशन, सत्याग्रह,धरना जैसे शब्द मजाक बन कर रह गए हैं.
हो सकता है रात का डिनर करने के बाद बिस्तर में रात भर के अनशन पर चले गये हों.चायनीज खिलौनों की तरह चायनीज अनशन भी हो सकता है,ये नही मालूम था.Fast का अर्थ उपवास या अनशन होता है,मगर fast का अर्थ तेज भी होता है,fasting भी fast हो सकता है इसकी जानकारी देने के लिए बिन्नी जी को हार्दिक धन्यवाद.बिन्नी जी का हमें हौसला बढ़ाना चाहिए ताकि वे अगले साल 4 या 5 घंटे का आमरण अनशन कर सकें.20-20 के क्रिकेट मैच से भी छोटा निकला इनका अनशन.अब तो कोई भी ऐसा अनशन कर लेगा.अनशन के बाद अंट-शंट बका भी है T.V. कैमरे पर.अनशन करने गये थे या अंट-शंट बकने,ये तो वे ही जाने,मगर अपना पेट भरने के चक्कर में बेचारे T.V. चैनलों के पेट पर लात नही मारना चाहिए था.अब ये बेचारे T.V. वाले सास -बहू के षड्यंत्रों के सिवा क्या दिखा सकते हैं?
वैसे बिन्नी जी के अनशन के वक़्त मोबाइल कॉल की इनकमिंग और आउट गोइंग डिटेल निकाली जाय तो बहुत कुछ पता लग सकता है.

Sunday, January 12, 2014

प्रशांत भूषण जैसे बुद्धिजीवी पाकिस्तान के बदले भारत में ही क्यों होते हैं?

प्रशांत भूषण जैसे बुद्धिजीवी क्या पाकिस्तान में भी पाए जाते हैं जो ये कह सकें कि”आजाद काश्मीर” भारत को सौंप दिया जाय?पाकिस्तान से “चंदा” खाने वाला आदमी ही केवल काश्मीर में जनमत संग्रह करवा कर काश्मीर को भारत से अलग करवाने की बात कर सकता है.वो सारे भारत में काश्मीर को अलग किया जाय या नहीं इस पर जनमत संग्रह की बात क्यों नहीं करता?केवल काश्मीर घाटी की जनता की भावना कद्र होनी चाहिए या सम्पूर्ण भारत के जनता की?
काश्मीर से सैकड़ों शहीदों की लाशों पर कुछ न बोलने वाला भूषण चाहता है कि भारतीय सेना काश्मीर से हटे और पाकिस्तानी सेना काश्मीर पर कब्जा कर ले.प्रशांत भूषण यदि प्रधान मंत्री बन जाय किसी कारण से तो हफीज सईद से ज्यादा खुश कौन होगा?
“आम आदमी पार्टी” जनमत संग्रह करवाने पर भरोसा करती है.यदि वे नौटंकी नहीं करते हैं तो इन चार बातों पर सम्पूर्ण भारत में जनमत संग्रह करवा कर देख लें.[1]काश्मीर भारत में रहे या पाकिस्तान में?[2]प्रशांत भूषण भारत में रहे या पाकिस्तान में?[3]प्रशांत भूषण मुक्त भारत होना चाहिए या नही?[4]प्रशांत भूषण को प्रशांत महासागर में डुबाया जाय या नहीं जहाँ वो ओसामा बिन लादेन की रूह से बातें कर सके.

Friday, January 10, 2014

अमर सिंह ने अमिताभ बच्चन को नहीं पहचाना.

श्री अमिताभ बच्चन को पहचानने में श्री अमर सिंह जैसे पढेलिखे,अनुभवी, और धनी नेता को गलत फहमी हो जाना आश्चर्य लगता है.अमर सिंह ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान राज ठाकरे के साथ एक ही मंच पर खड़े होने पर अमिताभ बच्चन को आड़े हाथों लिया.अमर सिंह ने पुरानी बातें याद दिलाते हुए कहा कि अमिताभ ने एक समय बाल ठाकरे के प्रति सम्मान जताते हुए कहा था की वे मेरे पिता समान हैं और जब बाल ठाकरे नहीं रहे तो अमिताभ राज ठाकरे के साथ हो गए.
अमिताभ बच्चन की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए अमर सिंह ने कहा कि ”अमिताभ गुजरात में नरेंद्र मोदी के साथ हैं,यू.पी.में मुलायम सिंह के साथ हैं.पता ही नहीं चलता कि वे कब किसके साथ हो जाएंगे.”
सीधी सी बात है जो सबके साथ होता है,असल में वो किसी के भी साथ नहीं होता है,वो सिर्फ अपने साथ होता है.

Tuesday, January 7, 2014

देश की राजनीति बदलने के बजाय देश का भूगोल बदलने की बात करना गलत है.

देश की राजनीति बदलने की बात करने वाले देश का नक्शा बदलने की और भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करते करते काश्मीर मुक्त भारत की बात करने लगे हैं.”आप”पार्टी को लगता है कि वो यदि काश्मीर पाकिस्तान को,असम बांग्लादेश को और लद्दाख,सिक्किम और अरुणांचल प्रदेश चीन को देने की बात करके दिल्ली वालों को मुफ्त पानी बिजली देने की बात करे तो उनकी बात का कोई बुरा नहीं मानेगा.काश्मीर पर जनमत संग्रह की बात करने वाले राम मंदिर पर जनमत संग्रह की बात क्यों नही करते?पाकिस्तान के प्रति इतनी उदारता क्यों?कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्हें फंड अमेरिका के साथ साथ पाकिस्तान से भी मिला है?”जैसा अन्न वैसा मन” वाली बात तो पूरी तरह इन पर लागु हो रही है,पाकिस्तान का खाएँगे तो पाकिस्तान का ही गायेंगे.
जिस जगह नीच से नीच आदमी के गिरने की संभावना खत्म हो जाती है,उस जगह से “आप”वाले गिरना शुरु करते हैं.ये अमेरिका से चंदा लेंगे,चलेंगे जापान की कार में,हुक्म इटली वालों का मानेंगे,खाएँगे भारत का और बातें पाकिस्तान की करेंगे.कुमार विश्वास अपनी कविताओं के लिए मुसलमानों से माफ़ी मांगते हैं और हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हैं.”आप”का नाम “आम आदमी पार्टी” से बदलकर “अल्लाहू अकबर पार्टी” कर देना चाहिए.
दिसम्बर में 5 सरकारे बनी,4 गम्भीरता पूर्वक कम कर रही हैं,नौटंकी सिर्फ दिल्ली में हो रही है.नौटंकी कितनी भी अच्छी हो ज्यादा दिन भीड़ नही खींच सकती.राखी बिड़ला के पिता का नाम भूपेन्द्र कुमार बिड़लान है,बिड़लान की बेटी यदि बिड़ला होती है तो सिर्फ इसलिए की बिड़ला देश के सबसे मशहूर घरानों में से एक है,ये भी अच्छी नौटंकी है.राखी बिड़ला भविष्य की मायावती बन सकती हैं,अंतर सिर्फ इतना होगा की मायावती के पास “कांशीराम”थे और इनके पास “खांसीराम” हैं.

Saturday, January 4, 2014

पलटी मारने में केजरीवाल का जवाब नही है.

चुनाव के बाद जितनी पलटियां केजरीवाल और उनकी पार्टी ने खाई है,वे भारतीय राजनीति में बेजोड़ हैं.नयी नवेली दुल्हन भी अपने मेहंदी के उतरने का इंतजार करती है,मगर इनसे उतना भी इंतज़ार करना मुश्किल लगा.रिश्वत लेने वालों के खिलाफ 2 दिन में फोन लाइन देने का वादा किये मगर अभी तक कोई फोन लाइन “आम आदमी” को नही मिली.चंदा इन्होने फोर्ड से लिया मगर गाड़ियाँ फोर्ड से खरीदने के बजाय टोयोटा से लीं.जबकि भारत सरकार की सरकारी गाड़ी एम्बेसडर है क्या उन्हें ये मालूम नही था?
विधानसभा में जदयू विधायक शोएब इकबाल ने खुद को गुंडा कहा उन्होंने उसका भी समर्थन ले लिया.दिल्ली की जनता से ये भी s.m.s.करवा कर नही पूछा कि उन्हें बंगला लेना चाहिए या नही?”आम जनता” तो झोपड़ों में रहती है.यदि झोपड़े में नही रह सकते थे,तो किसी “रैन बसेरे” में रह लेना चाहिए था,ताकि आम आदमी को भी लगता की ये वास्तव में आम आदमी हैं कोई नौटंकी बाज़ नही.इनसे इस बात की उम्मीद करनी बेकार है कि गुरु गोविन्द सिंह की भांति धर्म की रक्षा के लिए अपने बेटों की क़ुरबानी दे सकें,ये तो आए ही हैं सत्ता में अपने बेटे की झूठी कसम खा कर.
इनके द्वारा लगातार पलटियां खाने पर एक मित्र की कविता “अब तो दिल्ली में ये खुले आम होगा,चोर और सिपाही में दुआ सलाम होगा.चुनाव से पहले कहते थे इस अपराधी को फांसी,उस अपराधी को फांसी,चुनाव के बाद इधर खांसी,उधर खांसी.

Wednesday, January 1, 2014

जीवन का हर पल नया है.

जीवन का हर पल नया है.इस साल का हर दिन आपके लिए नया दिन और हर रात नई रात हो.भूतकाल की यादों और भविष्य की कल्पनाओं के दो पहाड़ों के बीच वर्तमान का फूल दब कर पीस न जाए इसकी कामना करते हुए नए साल के नए दिन की बधाइयाँ.

Monday, December 30, 2013

लोगों को टैंकर से पानी देने का खर्च कौन देगा दिल्ली सरकार या आम आदमी.

दिल्ली के लोगों को 1000 लीटर पानी कम मिलेगा,इसमें कोई परेशानी नहीं है,क्योंकि इस ठण्ड में बहुत कम पानी से नहाने का काम हो जाता है.परेशानी इस बात की है की मुफ्तपानी केवल 3 महीने तक ही मिलेगा,वो भी उन लोगों को जिनके पास मीटर है.जबकि ‘आप’ को जिन लोगों ने वोट दिया था उनके पास मीटर ही नही है.इन्हें टैंकर से पानी मिलेगा या नही,टैंकर का पैसा कौन देगा दिल्ली सरकार या ‘आम आदमी’?
कुछ दिनों से बीमार केजरीवाल दिल्ली सरकार के खर्चे पर अपनी खाँसी और दस्त का इलाज करवा लेंगे.तब तक चाहें तो लोग एक मित्र की ताजातरीन गीत गुनगुनाएं.”होश वालों को खबर क्या,दस्त भी क्या चीज है,दस्त लगे फिर खांसिये,पता लगे क्या चीज है?

Friday, December 27, 2013

अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को निराश किया है.

अमिताभ बच्चन ने राज ठाकरे जैसे अपराधी और मूर्ख के साथ बैठ कर अपने चाहने वालों को निराश किया है.नेता और अपराधी में एक फर्क होता है,नेता सिस्टम के साथ चलता है और अपराधी सिस्टम तोड़ कर चलता है.भारत का सिस्टम कहता है कि कोई भी भारतवासी देश के किसी भी हिस्से में किसी के भी साथ कितने भी वक्त तक रह सकता और नौकरी या बिज़नेस कर सकता है.
राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों को मारपीट कर भगाने का काम किया,जो कोई अपराधी ही कर सकता है,कोई नेता नही ऐसा नही कर सकता.राज ठाकरे एक तरफ उत्तर भारतीयों को मारपीट कर भगाता और दूसरी तरफ वह उत्तर भारतीय अमिताभ बच्चन के पैर छूता है,पता नही ऐसा करके वो क्या दिखाना चाहता है?
जिस जगह पर कोई जाना नहीं चाहता उस जगह की पर किसी प्रकार की तरक्की नहीं होती जैसे सोमालिया,बांग्लादेश,नेपाल,पूर्वी उत्तर प्रदेश भारत के नक्सलवादी क्षेत्र ईत्यादि.जिस जगह पर तमाम लोग जातें हैं वहाँ बेजोड़ तरक्की होती है,जैसे लन्दन,न्यू यॉर्क,पेरिस,बीजिंग,हांगकांग,सिंगापूर,दुबई, सुरत,बंगलौर,दिल्ली,मुंबई इत्यादि.यहाँ आने वाला व्यक्ति पूँजी,ज्ञान,कला,श्रम लेकर आता है.हर आने वाला नया व्यक्ति उस जगह कम से कम 5 आदमियों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है,वह किसी के होटल में खाना खाता,कहीं कपड़े खरीदता,सिलवाता,और धुलवाता है,कहीं राशन खरीदता,किसी की टैक्सी में बैठता,किसी के सिनेमा हॉल में सिनेमा देखता है तो वहाँ चतुर्दिक विकाश होता है.और जिस जगह से लोगों का पलायन होता है,वहाँ से जाने वाला हर व्यक्ति कम से कम 5 व्यक्तियों की आमदनी कम करके चला जाता है,जिससे वह क्षेत्र और पिछड़ा हो जाता है.
समझदार नेता लोगों को अपने यहाँ आने का न्योता देता है ताकि उसके यहाँ तरक्की हो,मगर राज ठाकरे जैसा अपराधी और मूर्ख लोगों को भगाने में रूचि रखता है,और उसके जैसे अपराधी को वहाँ की सरकार गिरफ्तार न करके एक प्रकार से उसका साथ दे रही है,तथा अमिताभ बच्चन उसके साथ मंच पर बैठते हैं.लगता है अमिताभ बच्चन के अंदर का बुद्धिजीवी और एंग्री यंगमैंन मर चुका है.

Thursday, December 26, 2013

केजरीवाल,जॉनी वाकर,राजू श्रीवास्तव और कपिल शर्मा देश के चार सबसे बड़े जोकर हैं.

श्री अरविन्द केजरीवाल,जॉनी लीवर,राजू श्रीवास्तव और कपिल शर्मा देश के चार बड़े जोकर हैं,हालाँकि चारों अलग-अलग प्रकार से जोकरई करते हैं.जहाँ कपिल शर्मा द्विअर्थी भाषा से हँसाते है,राजू श्रीवास्तव लोगों को हँसाते हुए स्वयं भी हँसते हैं,जॉनी लीवर स्वयं बिना हँसे लोगों को हँसाते है और श्री अरविन्द केजरीवाल अपने पाखंड के कारन लोगों को हँसाते हुए स्वयं हँसी के पात्र बन जाते हैं.आज बहुत से लोगो के नौटंकी कहते ही दिमाग में केजरीवाल की तस्वीर बनने लगती है.डर है की लगातार नाटकीय सीरियल बनाने वाली एकता कपूर इनके चलने वाले अंतहीन नाटकों से घबरा कर कहीं कुछ ऐसा वैसा न कर बैठे.
जिस भ्रष्टाचारी दुर्योधन से लड़ने वाला अर्जुन बनने का दावा करते थे,उसी दुर्योधन की गोद में जाकर वे बैठ गए,कहीं किसी ‘गीता’ का जन्म नहीं हुआ और श्रीकृष्ण तथा जनता माथा पीट कर रह गई.पिछले चुनाव में बीजेपी 32 सीट पाकर 4 सीट का जुगाड़ नही कर पाई और जिस कांग्रेस से इनका ३६[36] का आंकड़ा था,उसी कांग्रेस की 8 सीटो से अपनी 28 सीटों को मिलाकर वे बहुमत के 36 के आंकड़े तक पहुँच गए.अब इसे उनका कांग्रेस से ‘गठ बंधन’ कहें या ‘ठग बंधन.अपने बच्चे की झूठी कसम खाकर इनके द्वारा सरकार बनाना ये साबित करता है वे नेता बनने के लिए ही पैदा हुए थे अफसर बनने के लिए नही.
आज कल इनके चुनाव चिन्ह झाड़ू को लेकर कई गानों की पैरोडियाँ लोगों के जुबान पर चढ़ गई है.[1] झाड़ू के तिनके से तुझको सजा कर,कचरे के डिब्बे में तुझ को बिठा कर,रखूंगा नाली के पास,मत होना ‘आप’ उदास.[2]झाड़ू को थोडा राउंड घुमा के,अन्ना के जैसा टोपी लगा के,तौकीर बुखारी से हाथ मिला के,दिल्ली वालों को उल्लू बनाके,केजरी डांस,केजरी डांस,केजरी डांस.
इस तरह के मजाक सिर्फ इसलिए हो रहे हैं कि राजनीति के गाय के गोबर से अपनी राजनैतिक जमीन को लीप कर पवित्र करते हुए वे अपने विरोधियों के मुँह पर उसी गोबर को लपेट देते हैं

Monday, December 23, 2013

केजरीवाल की राजनीति वैश्यावृति से भी गई गुजरी है.

वैश्यावृति संसार का सबसे पुराना धंधा है,राजनीति उसके बाद दूसरा सबसे पुराना धंधा है.श्री अरविन्द केजरीवाल के कहने और करने में इतना अंतर है कि पता ही नही चलता की राजनीति कब वैश्यावृति में और वैश्यावृति कब राजनीति में बदल जाती है.
बीजेपी और कांग्रेस दोनों को गालियाँ देने वाले केजरीवाल अब कांग्रेस की मदद से सरकार बनाने की तैयारी कर रहे हैं.सबसे ज्यादा अखरने वाली बात केजरीवाल के ट्विटर एकाउंट को देखने पर मिलती है.इसमें उनके 8,93,965 फोलोवर हैं तथा उन्होंने 72 लोगों को फॉलो किया है, जिनमे कांग्रेसी नेता शशि थरूर और दिग्विजय सिंह ही नही बीजेपी नेता विजय गोयल और सुब्रमनियन स्वामी भी शामिल हैं.और तो और आर एस एस के राम माधव ही नही बीजेपी के ऑफिसियल एकाउंट को भी वे फ़ॉलो करते हैं.
किसी को भी फ़ॉलो करना बुरी बात नही है.कोई अमिताभ को ,कोई सचिन को,कोई मोदी को तो कोई सनी लीओन को फ़ॉलो करता है,मगर कोई भी अपने द्वारा फ़ॉलो किये गए व्यक्ति को गालियाँ नही देता,जैसा की श्री अरविन्द केजरीवाल करते हैं.
बीजेपी अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह के 1,37,103 फोलोवर हैं,और सिर्फ 1 को फॉलो करते हैं,बीजेपी को जिसके वे स्वयं अध्यक्ष भी हैं,तो इसमें कोई बुराई नही है.श्रीमती वसुंधराराजे सिंधिया किसी को भी फॉलो नही करती और उनके 42,732 फोलोवर हैं.श्री नरेन्द्र मोदी के 30,27,753 फोलोवर हैं,और वे 886 लोगों को फ़ॉलो करते हैं.ये तीनो नेता अपने अपने स्थान पर सफल भी हैं,और केजरीवाल की तरह पाखंडी भी नही हैं.
राजनीति विज्ञान की पढाई भले ही कला [Arts] में जाती हो मगर है वह विज्ञान [science] ही.केजरीवाल जैसे कलाकार कलाबाजियाँ खाते हुए जब राजनीति में आते हैं,तो राजनीति सुहागिन या विधवा नही होती वैश्या हो जाती है.